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Tuesday, September 15, 2020

September 15, 2020

नींबू के रस में शहद मिलाकर लगाने से चेहरे की झुर्रिया कम होती हैं।

 नींबू के रस में शहद मिलाकर लगाने से चेहरे की झुर्रिया कम होती हैं। 


4 नींबू के रस में 1 चम्मच दूध मिला लें। रोज रात को सोने से पहले इसे चेहरे और गर्दन पर लगा लें। 15 मिनट के बाद मौसम के अनुसार ठंड़े या गर्म पानी से धो लें। इस तरह चेहरे की सफाई के साथ-साथ यह त्वचा को नर्म और मुलायम भी रखता है। 2 चम्मच नींबू का रस, थोड़ी सी दूध की मलाई और थोड़ा सा बेसन या मैदा को मिलाकर उबटन बना लें और चेहरे पर मलें। इससे चेहरे की खुश्की दूर होती है और चेहरे में चमक आती है। 2 चम्मच आटा, 4 चम्मच दूध, 1 चुटकी हल्दी और एक नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह से गूंथ लें और नहाने से पहले शरीर पर मलें, इसके लगाने के 10 मिनट बाद नहा लें और नहाने में साबुन का प्रयोग न करें। इससे शरीर की कोमलता बढ़ती है और शरीर सुंदर होता है। अण्डे की सफेदी में नींबू का रस मिलाकर मुंह पर चुपड़ने से व फिर गुनगुने पानी से धोने से चेहरे पर रौनक आ जाती है। नींबू के रस और समुद्र के झाग को मिलाकर चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे हट जाते हैं। समुद्र का झाग न मिले तो केवल नींबू का रस दूध की मलाई में मिलाकर लगाने से लाभ मिलता है।


गुनगुने पानी में नींबू का रस निचोड़कर हाथों को थोड़े समय तक उसमें डुबोकर रखें। इसके बाद हाथों को किसी तौलिए से अच्छी तरह साफ कर लें। इससे हाथों का सारा मैल धुलकर साफ हो जाएगा। उसके बाद हाथों पर लगाने वाली क्रीम लगा लें। लगातार ऐसा करने से हाथ कोमल और सुंदर हो जायेंगे। नींबू के रस में 1 चम्मच चीनी मिलाकर हथेलियों को आपस में तब तक रगड़ते रहे जब तक चीनी उसमें घुल न जाए। इससे हाथों का खुरदरापन और झुर्रियां (सिलवटे) दूर हो जाएंगी। रात को सोने से पहले थोड़ी सी दूध की मलाई में 1 चौथाई नींबू का रस, थोड़ी सी ग्लिसरीन, 1 चम्मच गुलाबजल और कुछ बूंदे रोगन बादाम की मिलाकर हाथों पर लगा लें। बाद में ग्लिसरीन वाला साबुन लेकर गुनगुने पानी से हाथों को धों लें। इससे हाथों में निखार आता है।



 नींबू से गर्दन को रगड़कर साफ करके गर्दन पर दूध मलने से गर्दन सुंदर दिखने लगती है


। त्रिफला के चूर्ण को नींबू के रस में भिगोकर चेहरे पर लेप करके आधे घंटे के बाद चेहरे को धोने से चेहरे की खूबसूरती बढ़ जाती है। त्वचा ज्यादा तैलीय हो जाने पर चेहरे पर दाग-धब्बे और मुंहासे निकल आते हैं। तेलीय त्वचा को रोजाना 2 बार साबुन से धोना चाहिए। नींबू को चेहरे पर रगड़ने से भी तेलीय त्वचा ठीक हो जाती है। कूठ को 7 दिनों तक नींबू के रस में भिगोकर रख दें फिर सात दिनों के बाद इसको पीसकर शहद के साथ मिलाकर कुछ दिनों तक चेहरे पर लगाने से चेहरा पूरी तरह चमकदार हो जाता है। नारंगी और नींबू के छिलकों को बराबर मात्रा में लेकर छाया में सुखा लें और एक साथ मिलाकर पीस लें। त्वचा के रोगों का मुख्य कारण है हमारे पेट की गर्मी है इसलिए हमें पेट की गर्मी को ठीक रखने के लिए खाने में नींबू और प्याज का ज्यादा उपयोग करना चाहिए। नारियल के हल्के गर्म तेल में नींबू को निचोड़कर शरीर पर मालिश कर लें। इससे शरीर में जितनी तेल की कमी होती है वह पूरी हो जाती है और मांसपेशियो में कसावट आ जाती है। 20 मिलीलीटर नींबू के रस को 2 बार कपड़े में छानकर, 20 ग्राम ग्लिसरीन और 20 मिलीलीटर गुलाबजल को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका लेप बनाकर रख लें। इस लेप को रोजाना रात को सोने से पहले चेहरे पर हल्के-हल्के हाथ से लगाने से चेहरा रेशम के जैसा मुलायम और सुंदर बन जाता है। चेहरे के सारे दाग, कील, झांईयां और मुंहासे दूर होकर चेहरे की चमक को बढ़ाते हैं। इसे 15 से 20 दिनों तक रोजाना लगाने से ही कील-मुंहासे दूर हो जाते हैं और चेहरा बिल्कुल साफ होकर मुलायम बन जाता है।



तैलीय तैलीय त्वचा

 वाले स्त्री-पुरुषों को रोजाना 2 बार साबुन लगाकर चेहरा धोने से आराम मिलता है। चेहरे पर नींबू को रगड़ने से तैलीय त्वचा में लाभ होता है।


Monday, September 14, 2020

September 14, 2020

नींबू का उपयोग कहां कहां किया जाता है

नींबू का उपयोग कहां कहां किया जाता है


एक रसीला फल है। इसमें सिट्रिक अम्ल अधिक होता है। यह क्षारीय दृष्टि से एक अपरिहार्य फल है। नींबू का अचार भी डाला जाता है। नींबू के रस के बिना गाजर, मूली, खीरा, ककड़ी, प्याज आदि के सलाद को स्वाद (टेस्ट) नहीं होता हैं। नमक आदि से निर्मित चटनी में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से भूख लगती है और पाचन क्रिया तीव्र होती हैं। नींबू मीठे, कुछ कड़वाहट लिए हुए तथा कागजी नींबू खट्टे होते हैं। गर्मी के मौसम में नींबू के रस का शर्बत बनाकर पिया जाता है।




रंग कच्चा नींबू हरा और पक जाने पर पीला हो जाता है।




स्वरूप : नींबू के छोटे झाड़ीनुमा कंटीले पेड़ होते हैं। नींबू की पत्तियां छोटी होती हैं। पत्तियों को मसलने पर खुशबू आती है। इसके फूल भी सुगंधित होते हैं। नींबू का फल गोल, चिकने, कच्चेपन में हरे और पकने में पीले रंग के हो जाते हैं।




 नींबू में पाए जाने वाले तत्व : नींबू के फल में सिट्रिक एसिड, फास्फोरिक एसिड, मेलिक एसिड और शर्करा आदि तत्व पाये जाते हैं। नींबू के फल में तेल तथा तिक्त स्फटिकीय ग्लूकोसाइड हेस्पेरिडिन (विशेष रूप से छिलके के सफेद भाग) में पाया जाता है।




तत्व मात्रा तत्व मात्रा : प्रोटीन 1 प्रतिशत विटामिन-सी 39 मिलीग्राम/100 ग्राम वसा 0.9 प्रतिशत लौह 2.3 मिलीग्राम/100 ग्राम कार्बोहाइड्रेट 11.1 प्रतिशत फास्फोरस 0.03 प्रतिशत पानी 8.5 प्रतिशत कैल्शियम 0.07 प्रतिशत रेशा 1.8 प्रतिशत अन्य विटामिन व खनिज अल्प मात्रा में




हानिकारक : पेट में घाव, पैरों के जोड़ों में दर्द, गले की टॉन्सिल, चक्कर आना तथा निम्न रक्तचाप वाले रोगियों को नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए। कमजोर यकृत (लीवर) वाले रोगी यदि नींबू का सेवन करते हैं तो उनके हाथ पैरों में तनाव पैदा होता है और निर्बलता (कमजोरी) बढ़ती जाती है। यदि नींबू का सेवन जारी रहता है तो बुखार आता है। खांसी होने पर खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसे करने से खांसी बढ़ती जाती है।




गुण : नींबू त्रिदोष नाशक (वात, पित्त और कफ को नष्ट करने वाला), दीपक-पाचक (भोजन को पचाने वाला), क्षय (टी.बी.), हैजा (विसूचिका), गृहबाधा निवारक, रुचिकारक (भूख को बढ़ाने वाला) और दर्द में लाभ देता है। नींबू के रस को पीने से रक्तपित्त (खूनी पित्त), स्कर्वी रोग में लाभ होता हैं। नींबू के फल की छाल को खाने से वायु (गैस) शान्त होती है। नींबू का रस हृदय के लिए लाभकारी, ज्वर (बुखार) को कम करने वाला और मूत्रजनन (पेशाब को लाने वाला) होता है। नींबू के रस को चीनी के साथ सेवन करने से अफारा (गैस का बनना), बदबू, डकारें, उदर शूल (पेट में दर्द) और उल्टी आदि विकार दूर हो जाते हैं। नींबू पित्त, मलस्तम्भक (मल को रोकना), कब्ज, गांठे, जोड़ों का दर्द (आमवात), कंठशूल (गले का दर्द) और जहर में लाभकारी है। नींबू का रस आमाशय, आंतों और खून की अम्लता (एसिडिटीज) की अधिकता को कम कर देता है जिससे स्नायु का दर्द और अधिक कमजोरी दूर होती है।

Sunday, June 28, 2020

June 28, 2020

Hair tips ठंड के दौरान खुजली व रूसी से बचने के उपाय़

ठंड के दौरान खुजली व रूसी से बचने के उपाय़
ठंड के दौरान खुजली व रूसी से बचने के उपाय़

सिर की त्वचा सूखी होने के कारण जलन,खुजली और रूसी की समस्या आ सकती है। सिर की सूखी त्वचा कभी कभी गंभीर समस्या जैसे एक्जिमा और सोरेसिस की ओर भी संकेत करती है। यह कोई गंभीर समस्या नहीं है परन्तु यह मौसम के अनुसार हो सकता है। यदि यह मौसम के कारण है तो घरेलू उपचार द्वारा इससे निपटा जा सकता है तथा हर बार मेडिकल जांच की आवश्यकता नहीं होती।
यहाँ कुछ सरल घरेलू उपचार बताए गए हैं जिनके नियमित उपयोग से सिर की त्वचा की नमी बढ़ती है तथा सूखी त्वचा से संबंधित समस्याएं कम होती हैं।
टिप्स 1 :
पहले अपने सिर की त्वचा को पानी से गीला करें तथा फिर इसे सूखने दें।
अब ऐप्पल सीडर विनेगर और पानी की बराबर मात्रा मिलाएं और उसे स्प्रे बोतल में भरें।
कॉटन बॉल्स (रुई के फाहे) की सहायता से इस मिश्रण को अपने सिर की त्वचा पर लगायें।
इसे कुछ समय के लिए ऐसे ही छोड़ दें और फिर अपने बालों को हर्बल शैंपू से धोएं।
सिर की सूखी त्वचा से जल्दी छुटकारा पाने के लिए हर दूसरे दिन इस उपाय को अपनाएँ।
टिप्स 2 :
एक टेबल स्पून वेजिटेबल ऑइल में 2-3 बूँद टी ट्री ऑइल मिलाएं।
अब इस मिश्रण को अपनी हथेलियों पर लें तथा तेल को अपने हाथों पर फ़ैलाने के लिए अपनी हथेलियों को रगड़ें। इस मिश्रण से धीरे धीरे अपने सिर पर मालिश करें।
अपने सिर की त्वचा की स्थिति में सुधार करने के लिए रोज़ सोने से पहले इस उपचार को अपनाएँ।
टिप्स 3 :
अपनी उँगलियों की सहायता से एलोवीरा जेल को अपने सिर की त्वचा पर फैलाएं।
इसे 10-15 मिनिट ऐसे ही लगा रहने दें तथा फिर बालों को शैंपू से धो डालें।
इसका प्रतिदिन उपयोग करें जब तक आपको कोई सुधार न दिखने लगे।
टिप्स 4 :
2 टेबलस्पून नीबू के रस में 3 चम्मच दही मिलाएं।
इसे अपनी सिर की त्वचा पर पर लगायें और 10-15 मिनिट तक रखा रहने दें।
शैंपू से धो डालें। इस मिश्रण को आप प्रतिदिन तब तक अपना सकती हैं जब तक खुजली और सूखापन गायब नहीं हो जाता।
टिप्स 5 :
नारियल के तेल को हल्का गरम करें और इससे सिर की त्वचा पर हलके हाथों से मालिश करें।
इसे कम से कम एक घंटे लगा रहने दें तथा बाद में इसे शैंपू से धो डालें।
उत्तम परिणाम के लिए इस आसान उपचार को सप्ताह में कम से कम तीन बार करें।

Saturday, June 27, 2020

June 27, 2020

गर्दन का दर्द gardan Dard health tips

गर्दन का दर्द gardan Dard health tips
हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी में कुल मिलाकर 33 कशेरुकाएं होती हैं जिसमें 7 कशेरुकाएं गर्दन से सम्बन्धित होती हैं। इन कशेरुकाओं को सरवाइकल वर्टिबा कहते हैं। इन कशेरुकाओं से निकली वातनाड़ियां मस्तिष्क, आंख, नाक, कान, माथा, मुंह, दांत, तालु, जीभ, थाइरायड ग्रंथि तथा कुहनियों का संचालन करती हैं। इसलिए यदि गर्दन में कोई रोग हो जाता है तो इसका प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर भी पड़ता है।
गर्दन में दर्द होने के लक्षण-

          इस रोग के हो जाने पर गर्दन में अकड़न व दर्द होना शुरू हो जाता है। कुछ समय बाद गर्दन में धीरे-धीरे दर्द तथा अकड़न बढ़ती जाती है। इस रोग के कारण दर्द कभी कंधे व सिर व दोनों बाजुओं में शुरू हो जाता है। इस रोग के कारण रोगी की एक या दोनों बाजुओं में सुन्नता होने लगती है। जिसके कारण रोगी को सब्जी काटने या लिखने से कठिनाई महसूस होती है, सिर में चक्कर भी आने लगते हैं, हाथ पैरों की पकड़ कमजोर पड़ जाती है तथा गर्दन को इधर-उधर घुमाने में परेशानी होने लगती है। इस रोग के कारण रोगी को बेचैनी जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं।

गर्दन में दर्द होने के कारण-

अपने भोजन में तली-भुनी, ठण्डी-बासी या मसालेदार पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण भी गर्दन में दर्द का रोग हो सकता है।
गर्दन में दर्द गलत तरीके से बैठने या खड़े रहने से भी हो जाता है जैसे-खड़े रहना या कूबड़ निकालकर बैठना।
भोजन में खनिज लवण तथा विटामिनों की कमी रहने के कारण भी गर्दन में दर्द की समस्या हो सकती है।
कब्ज बनने के कारण भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
पाचनशक्ति में गड़बड़ी हो जाने के कारण गर्दन में दर्द का रोग हो सकता है।
अधिक चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, शोक या मानसिक तनाव की वजह से भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
किसी दुर्घटना आदि में किसी प्रकार से गर्दन पर चोट लग जाने के कारण भी गर्दन में दर्द का रोग हो सकता है।
अधिक शारीरिक कार्य करने के कारण गर्दन में दर्द हो सकता है।
मोटे गद्दे तथा नर्म गद्दे पर सोने के कारण गर्दन में दर्द हो सकता है।
गर्दन का अधिक कार्यो में इस्तेमाल करने के कारण गर्दन में दर्द हो सकता है।
अधिक देर तक झुककर कार्य करने से गर्दन में दर्द हो सकता है।
व्यायाम न करने के कारण भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
अधिक दवाइयों का सेवन करने के कारण भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
शारीरिक कार्य न करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
चिंता, क्रोध, मानसिक तनाव, ईर्ष्या तथा शोक आदि के कारण भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
किसी दुर्घटना में गर्दन पर चोट लगने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
गर्दन के दर्द को प्राकृतिक चिकित्सा से ठीक करने के लिए उपचार-

गर्दन के दर्द को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार सबसे पहले रोगी के गलत खान-पान के तरीकों को दूर करना चाहिए और फिर रोगी का उपचार करना चाहिए।
इस रोग से पीड़ित रोगी को हमेशा पौष्टिक भोजन करना चाहिए। रोगी को अपने भोजन में विटामिन `डी` लोहा, फास्फोरस तथा कैल्शियम का बहुत अधिक प्रयोग करना चाहिए ताकि हडि्डयों का विकास सही तरीके से हो सके और हडि्डयों में कोई रोग पैदा न हो सके।
शरीर में विटामिन `डी` लोहा, फास्फोरस तथा कैल्शियम मात्रा को बनाये रखने के लिए व्यक्ति को अपने भोजन में गाजर, नीबू, आंवला, मेथी, टमाटर, मूली आदि सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। फलों में रोगी को संतरा, सेब, अंगूर, पपीता, मौसमी तथा चीकू का सेवन अधिक करना चाहिए।
गर्दन में दर्द से पीड़ित व्यक्ति को चोकरयुक्त रोटी व अंकुरित खाना देने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
गर्दन के दर्द को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के ही एक भाग जल चिकित्सा का सहारा लिया जा सकता है। इस उपचार के द्वारा रोगी को स्टीमबाथ (भापस्नान) कराया जाता है और उसकी गर्दन पर गरम-पट्टी का सेंक करते है तथा इसके बाद रोगी को रीढ़ स्नान कराया जाता है जिसके फलस्वरूप रोगी की गर्दन का दर्द जल्दी ही ठीक हो जाता है। इस प्रकार से उपचार करने से रोगी के शरीर में रक्त-संचालन (खून का प्रवाह) बढ़ जाता है और रोमकूपों द्वारा विजातीय पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिसके फलस्वरूप रोगी की गर्दन का दर्द तथा अकड़न होना दूर हो जाती है।
गर्दन के दर्द तथा अकड़न को दूर करने के लिए सूर्य किरणों द्वारा बनाए गए लाल व नारंगी जल का उपयोग करने से रोगी को बहुत अधिक फायदा होता है। सूर्य की किरणों में हडि्डयों को मजबूत करने के लिए विटामिन `डी` होता है। सूर्य की किरणों से शरीर में विटामिन `डी` को लेने के लिए रोगी को पेट के बल खुले स्थान पर जहां पर सूर्य की किरणें पड़ रही हो उस स्थान पर लेटना चाहिए। ताकि सूर्य की किरणें सीधी उसकी गर्दन व रीढ़ की हड्डी पर पड़े। इस क्रिया को करते समय सिर पर कोई कपड़ा रख लेना चाहिए ताकि सिर पर छाया रहें।
गर्दन के दर्द को ठीक करने के लिए रोगी की गर्दन पर सरसों या तिल के तेल की मालिश करनी चाहिए। मालिश करते समय यह ध्यान देना चाहिए कि मालिश हमेशा हल्के हाथों से करनी चाहिए। मालिश यदि सूर्य की रोशनी के सामने करें तो रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
योगासन के द्वारा भी गर्दन के दर्द तथा अकड़न को ठीक किया जा सकता है। योगासन द्वारा गर्दन के दर्द तथा अकड़न को ठीक करने के लिए सबसे पहले गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं और फिर धीरे-धीरे गर्दन को आगे की ओर झुकाएं। फिर ठोड़ी को कंठ कूप से लगाएं। इसके कुछ देर बाद गर्दन को दाएं से बाएं तथा फिर बाएं से दाएं हल्के झटके के साथ घुमाएं।
गर्दन के दर्द तथा अकड़न को दूर करने के लिए भुजंगासन, धनुरासन या फिर सर्पासन करना लाभकारी रहता है।
गर्दन के दर्द तथा अकड़न को ठीक करने के लिए प्राणायाम व ध्यान का अभ्यास करें।
गर्दन के दर्द तथा अकड़न की समस्या को दूर करने के लिए रोजाना सुबह के समय में खुली ताजी हवा में घूमें।
गर्दन में दर्द होने पर इसका उपचार करने के लिए सबसे पहले गर्दन में दर्द होने के कारणों को दूर करना चाहिए।
योगाभ्यास तथा विशेष व्यायाम से गर्दन के दर्द से पूरी तरह छुटकारा मिल सकता है।
गर्दन के दर्द से पीड़ित रोगी को अपने कंधों को ऊपर से नीचे की ओर करना।
कंधों को सामने तथा पीछे की ओर गतिशील करना चाहिए इससे गर्दन का दर्द ठीक हो जाता है।
कंधों को घड़ी की दिशा में सीधी तथा उल्टी दिशा में घुमाना चाहिए जिससे गर्दन कां दर्द ठीक हो जाता है।
गर्दन से पीड़ित रोगी को अपनी उंगुलियों को गर्दन के पीछे आपस में फंसाना चाहिए और फिर फंसी उंगुलियों की तरफ दबाव देते हुए अपने कोहनी को आगे से पीछे की ओर गतिशील करना चाहिए जिसके फलस्वरूप गर्दन का दर्द जल्दी ही ठीक हो जाता है।
गर्दन से पीड़ित रोगी को अपने भोजन में विटामिन `डी´, लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
संतरा, सेब, मौसमी, अंगूर तथा पपीता व चीकू का उपयोग भोजन में अधिक करना चाहिए।
गर्दन में दर्द तथा अकड़न से बचने के लिए कुछ सावधानियां-

सोने के लिए व्यक्ति को सख्त तख्त का ही प्रयोग करना चाहिए।
सोते समय गर्दन के नीचे तकिए का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
किसी भी कार्य को करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को तनी हुई और बिल्कुल सीधी रखनी चाहिए।
गर्दन के दर्द तथा अकड़न का उपचार करते समय अधिक सोच-विचार नहीं करना चाहिए।
गर्दन में दर्द तथा अकड़न की समस्या से बचने के लिए वह कार्य नहीं करना चाहिए जिससे गर्दन या आंखों पर अधिक बोझ या तनाव पड़े।
गर्दन में दर्द तथा अकड़न की समस्या से बचने के लिए प्रतिदिन 6 से 8 घण्टे की तनाव रहित नींद लेना बहुत ही जरूरी है।
गर्दन के दर्द तथा अकड़न से बचने के लिए यह ध्यान देना चाहिए कि यदि खड़े है तो तनकर खड़े हो तो अपनी पीठ सीधी रखनी चाहिए।
आगे की ओर झुककर किसी भी कार्य को नहीं करना चाहिए।
जानकारी-

           इस प्रकार से कुछ नियमों का अपने जीवन में प्रयोग करने से गर्दन में कभी भी दर्द तथा अकड़न नहीं होता है। यदि गर्दन में दर्द तथा अकड़न हो भी गई है तो संतुलित भोजन का सेवन करके तथा प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करके जल्दी ही इस रोग को ठीक किया जा सकता है।






Friday, June 26, 2020

June 26, 2020

नींबू के 30 आयुर्वेदिक नुस्खेँ health tips in Hindi

नींबू के 30 आयुर्वेदिक नुस्खेँ health tips in Hindi

 1-शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।

2-नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।


3-नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।

4-नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।

5- नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।

6-नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।

7- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।

8- नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।

9-बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।

10-आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएं, रक्त की कमी दूर होगी।

11- दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा।

12- प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है।

13- किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा।

14- एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है।

15- चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है।

16- विशेषज्ञों का कहना है कि नींबू का रस विटामिन सी, विटामिन, बी, कैल्शियम, फ़ास्फ़ोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कार्बोहाईड्रेट से समृद्ध होता है।

17- विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मसूढ़ों से ख़ून रिसता हो तो प्रभावित जगह पर नींबू का रस लगाने से मसूढ़े स्वस्थ हो जाते हैं।

18- नींबू का रस पानी में मिलाकर ग़रारा करने से गला खुल जाता है।

19- नींबू के रस को पानी में मिलाकर पीने से त्वचा रोगों से भी बचाव होता है अतः त्वचा चमकती रहती है, कील मुंहासे भी इससे दूर होते हैं और झुर्रियों की भी रोकथाम करता है।

20- नींबू का रस रक्तचाप को संतुलित रखता है।

21-अगर बॉडी में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाए, तो एनिमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों की बीमारी, पायरिया, खांसी और दमा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। नीबू में विटामिन सी की क्वॉन्टिटी बहुत ज्यादा होती है। इसलिए इन बीमारियों से दूरी बनाने में यह आपकी मदद करता है।

22- पेट खराब, पेट फूलना, कब्ज, दस्त होने पर नीबू के रस में थोड़ी सी अजवायन, जीरा, हींग, काली मिर्च और नमक मिलाकर पीने से आपको काफी राहत मिलेगी।

23- गर्मी में बुखार होने पर अगर थकान महसूस हो रही हो या पीठ और बांहों में दर्द हो, तो भी आपके पास नींबू का उपाय है। आप एक चम्मच नींबू के रस में दस बूंद तुलसी की पत्तियों का रस, चार काली मिर्च और दो पीपली का चूर्ण मिलाकर लें। इसे दो खुराक के तौर सुबह-शाम लें।

24-चेहरे पर मुंहासे होना एक आम समस्या है। इसे दूर करने के लिए नींबू रस में चंदन घिसकर लेप लगाएं। अगर दाद हो गया है, तो इसी लेप में सुहागा घिसकर लगाएं, आपको आराम मिलेगा।

25- कई बार लंबी दूरी की यात्रा करने पर शरीर में बहुत थकान महसूस होती है। ऐसे में एक गिलास पानी में दो नींबू निचोड़कर उसमें 50 ग्राम किशमिश भिगो दें। रातभर भीगने के बाद सुबह किशमिश पानी में मथ लें। यह पानी दिनभर में चार बार पिएं। इससे एनर्जी मिलेगी और बॉडी की फिटनेस भी बनी रहेगी।

26-अधिक थकान और अशांति के कारण कई बार नींद नहीं आती। अगर आप भी इस प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, तो लेमन रेमेडी अपनाएं। रात को सोने से पहले हाथ-पांव, माथे, कनपटी व कान के पीछे सरसों के तेल की मालिश करें। इसके बाद थोड़े से नीबू के रस में लौंग घिसकर चाट लें। ऐसा करने से आपको नींद बहुत जल्दी आएगी।

27-मोटापे से आजकल हर दूसरा शख्स परेशान होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप मूली के रस में नीबू का रस व थोड़ा नमक मिलाकर नियमित रूप से लें। मोटापा दूर होगा।

28- अगर याददाश्त कमजोर हो गई है, तो गिरी, सोंठ का चूर्ण और मिश्री को पीसकर नींबू के रस में मिलाएं। फिर इसे धीरे-धीरे उंगली से चाटें।

29-सुंदर दिखना तो सभी चाहते हैं। अगर आपकी भी यही चाहत है, तो एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच गेहूं का आटा, आधा चम्मच गुलाब जल और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर लोशन तैयार करें। इसे धीरे-धीरे चेहरे पर मलें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा निखर जाएगा।

30- जहां तक हो सके, कागजी पीले रंग के नीबू का यूज करें। इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक मिला सकते हैं। यह टिप्स हमारी रीडर मीनू मोहले ने भेजे हैं।




June 26, 2020

लंबे समय तक बालों के कलर को कैसे बरकरार रखा जाता है इन हिंदी

लंबे समय तक बालों के कलर को कैसे बरकरार रखा जाता है इन हिंदी

टिप्स 1 :
बालों को कलर करने से पहले उन्हें शैंपू करना ना भूलें। अगर बाल चिपचिपे होंगे, तो उनमें सही तरह से कलर नहीं लग पाएगा। अगर कलर लग भी गया तो लंबे समय तक नहीं रह पाएगा।
टिप्स 2 :

बालों में मेहंदी लगी है, तो उन्‍हें कलर न करें। मेहंदी कलर को बालों पर अच्छी तरह चढ़ने नहीं देती। ऐसे में बालों से मेहंदी का रंग हटने के बाद ही कलर लगाएं।
टिप्स 3 :
कलर करवाने के बाद बालों में हेयर ग्लॉस लगवाएं। हेयर ग्‍लॉस लगाने से भी बालों का रंग ज्‍यादा दिनों तक बरकरार रहता है। कलर के बाद बालों पर केवल 10 मिनटों के लिए हेयर ग्‍लॉस जरूर लगवा लें।
टिप्स 4 :
अगर कोई नया कलर ट्राई कर रही हैं , तो उस कलर को पहले अपने कोहनी पर लगाकर देख लें। 15- 20 मिनट लगा रहने दें और फिर धो दें। उस दौरान खुजली या कोई दूसरा रिएक्शन होता है, तो तुरंत ब्रांड चेंज कर लें।
टिप्स 5 :
अगर स्कैल्प पर कोई घाव या फोड़े-फुंसियां हों, तो कलर न लगाएं। केमिकल्स लगने से यह समस्या बढ़ सकती है। अगर त्वचा संवेदनशील है, तो पहले हेयर स्टाइलिश से सलाह लें। वह आपको आपके बालों के टेक्सचर के मुताबिक सही कलर बताएंगे।
टिप्स 6 :
बालों को हमेशा डेमी परमानेंट हेयर कलर से ही रंगवाएं। यह एक असरदार टिप है जो हेयर कलर को ज्‍यादा समय तक बरकरार रखेगा। वरना बालों पर कलर केवल 30 शैंपू तक ही टिक पाते हैं।
टिप्स 7 :
कलर प्रॉटेक्टिव शैंपू का इस्तेमाल करें। इस शैंपू के जरिए आपका कलर लंबे समय तक रहेगा। ऐसे बालों पर हार्ड शैंपू या एंटी डैंड्रफ शैंपू यूज न करें।
टिप्स 8 :
शैंपू करने के बाद बालों पर कंडीशनर जरूर लगाएं। ये बालों की शाइनिंग बनाए रखते हैं। साथ ही बालों को सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाते हैं। अगर आपके बाल ड्राई और डैमेज हैं, तो कभी-कभार हेयर सीरम का इस्तेमाल कर सकती हैं।
टिप्स 9 :
अगर आप बालों को कर्ली या स्ट्रेट करवाने का प्लान कर रही हैं, तो यह दो से तीन हफ्ते पहले करवाएं। दोनों प्रक्रिया एक साथ करवाने से पूरी तरह बचें। दरअसल, एक साथ इतने केमिकल्स इस्तेमाल करने से आपके बाल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
टिप्स 10 :
अपने बालों को कभी भी गरम पानी से न धोएं। इससे बालों की क्‍वालिटी तो खराब होती ही है साथ में कलर भी चला जाता है। हमेशा ठंडा या हल्‍का गरम पानी ही इस्‍तेमाल करें।
June 26, 2020

बिना मेकअप करें कैसे देखें खूबसूरत इन हिंदी

बिना मेकअप करें कैसे देखें खूबसूरत इन हिंदी

टिप्स 1
सुबह की शुरुआत के लिए इससे अच्छी कोई आदत नहीं है। सुबह उठने के बाद चाय के बजाय गर्म पानी पिएं। इसमें नीबू की कुछ बूंदें डालें। ओवरवेट होने या डायबिटीज जैसी समस्या न हो तो थोडा शहद भी मिला सकती हैं। इससे ताजगी का एहसास होगा।
टिप्स 2 :

बिना मेकअप करें कैसे देखें खूबसूरत इन हिंदी

उम्र बढऩ के साथ-साथ धूप, धूल और समय का प्रभाव चेहरे पर पडऩे लगता है। इसलिए सनक्रीम हमेशा साथ रखें। तेज धूप हो या नहीं, इसका इस्तेमाल करें। इसके प्रयोग से आप बहुत सी समस्याओं से बची रह सकती हैं।
टिप्स 3 :
चेहरे को सिकोड़ते हुए बात करने, माथे पर बल डालने, आखें मिचमिचाने, हथेलियों को गालों पर टिकाने, पिंपल्स नोचने, आंखें मलने जैसी आदतें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। चेहरे की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए इस पर दाग-धब्बे बहुत पड़ते हैं। ये आदतें झुर्रियों को न्यौता भी दे सकती हैं।
टिप्स 4 :
नियमित फेशियल से चेहरे की मांसपेशियों में कसाव आता है, रक्त संचार ठीक होता है और चेहरा साफ व सुंदर दिखता है, मगर ब्लीच का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। ज्यादा मसाज व ब्लीच से संवेदनशील त्वचा को नुकसान हो सकता है।
टिप्स 5 :
रोज सोने से पहले क्लेंजिंग मिल्क से चेहरा साफ करें। हफ्ते में एक बार स्क्रबिंग करें। इससे डेड स्किन हटेगी। क्लेंजर से त्वचा बैक्टीरिया रहित होगी, अतिरिक्त तेल व डेड स्किन सेल्स निकलेंगी। ड्राई स्किन के लिए मॉइश्चराइजर वाला क्लेंजर अच्छा है।
टिप्स 6 :
रोज सात-आठ गिलास पानी पीना चाहिए। शरीर से हानिकारक तत्व निकालने का यह सर्वोत्तम उपाय है। यह सौंदर्य को बढ़ाता है और त्वचा को समस्या रहित रखता है।
टिप्स 7 :
मुलायम त्वचा के लिए मॉइश्चराइजर जरूरी है। प्रदूषण, मौसम, धूप और धूल से त्वचा को क्षति पहुंचती है। स्किन को सही पोषण और नमी मिले तो रिंकल्स कम पडेंग़े और वह ड्राई होने से बची रहेगी। चेहरे और गर्दन के अलावा हाथों और पैरों पर भी मॉइश्चराइजर का प्रयोग करें।
टिप्स 8 :
सप्ताह में कम से कम तीन दिन बालों को किसी अच्छे शैंपू से धोएं और कंडीशनर का इस्तेमाल करें। चिपचिपे-गंदे बाल चेहरे का लुक बिगाड़ देते हैं। दिन में दो-तीन बार और सोने से पहले बालों में कंघी करना न भूलें।
टिप्स 9 :
बालों की समय-समय पर ट्रिमिंग कराएं, ताकि वे दोमुंहे न हों और खराब न दिखें।
टिप्स 10 :
कम से कम सात घंटे की अच्छी नींद लें।
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Sunday, May 31, 2020

May 31, 2020

बालों को सीधा करने का उपाय इन हिंदी

बालों को सीधा करने का उपाय इन हिंदी
 बालों को सीधा करने का उपाय इन हिंदी

टिप्स
दूध :एक स्‍प्रे बोतल में 1/3 कप पानी और थोड़ा सा दूध मिक्‍स करें। इसे नहाने के 1 घंटे पहले अपने बालों में स्‍प्रे करें और एक बडे़ मुंह वाली कंघी से बालों को छाड़ लें। अपने बालों को शैंपू से और कंडीशनर से धो लें। आपके बाल तब तक सीधे रहेगें जब तक कि आप उसमें दुबारा शैंपू नहीं करती।

टिप्स 2
दूध और शहद :दूध से आपके बाल सीधे हो सकते हैं लेकिन बालों में शहद लगाने से सिर को अच्‍छा पोषण भी मिलेगा। इससे रूखे और कर्ली बाल मैनेज करने में आसानी हो जाती है।

टिप्स 3
मुल्‍तानी मिट्टी :1 कप मुल्‍तानी मिट्टी में 1 अंडा और 5 चम्‍मच चावल का आटा मिक्‍स करें। एक बडे़ दातों वाली कंघी ले कर बालों को अच्‍छे से झाड़ लें जिससे बाद में बाल ना टूटें। फिर बालों में पेस्‍ट लगाएं और बालों को सीधा रखने की कोशिश करें। 40 मिनट के बाद जब पेस्‍ट सूख जाए तब बालों को सादे पानी से धो लें। इस पेस्‍ट को हर दूसरे दिन प्रयोग करें। यह पेस्‍ट लगाने से पहले बालों में एक रात पहले तेल लगाएं।

टिप्स 4
ऑलिव ऑइल और अंडा :2 अंडों को फेट लें।उसमें 2 चम्‍मच ऑलिव ऑइल मिक्‍स करें। ब्रश की मदद से इस पेस्‍ट को बालो में लगाएं। 1 घंटे के बाद इसे शैंपू से धो लें। इससे बाल सीधे होगें और उनमें मजबूती भी आएगी

टिप्स 5

नींबू और नारियल :ताजे नारियल को घिस कर उसके दूध को निकाल लें। फिर उसमे नींबू का रस मिला कर फ्रिज में करीबन 1 दिन के लिये रखें। इसेस वह क्रीम का रूप ले लेगा। इसको ले कर सिर की मसाज करें। फिर गरम तौलिये को सिर में बांध कर स्‍टीम लें। फिर 1 घंटे के बाद बालों को शैंपू कर लें। इस विधि को हफ्ते में 3 बार करें, फिर आपको रिजल्‍ट मिलेगा।

Saturday, May 30, 2020

May 30, 2020

बालों के सफेद होने का कारण

बालों के सफेद होने का कारण
वैसे देखा जाए तो बढ़ती उम्र के साथ-साथ बालों का सफेद होना आम बात है, लेकिन समय से पहले बालों का सफेद हो जाना एक प्रकार का रोग है। जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसके बाल दिनों दिन सफेद होने लगते हैं। बालों का सफेद होना एक चिंता का विषय है और विशेषकर महिलाओं के लिए। यदि बाल समय से पहले सफेद हो जाते हैं तो व्यक्ति की चेहरे की सुन्दरता अच्छी नहीं लगती है। इसलिए बालों के सफेद होने पर इसका इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।
बालों के सफेद होने का कारण
1. असंतुलित भोजन तथा भोजन में विटामिन `बी´, लोहतत्व, तांबा और आयोडीन की कमी होने के कारण बाल सफेद हो जाते हैं।  
2. मानसिक चिंता करने के कारण भी बाल सफेद होने लगते हैं।  
3. सिर की सही तरीके से सफाई न करने के कारण भी व्यक्ति के बाल सफेद होने लगते हैं।
4. कई प्रकार के रोग जैसे- साईनस, पुरानी कब्ज, रक्त का सही संचारण न होना आदि के कारण बाल सफेद हो सकते हैं।
5. रसायनयुक्त शैम्पू, साबुन, तेलों का उपयोग करने के कारण भी बाल सफेद हो सकते हैं।
6. अच्छी या पूरी नींद न लेने के कारण भी बाल सफेद हो सकते हैं।
7. बालों को सही तरीके से पोषण न मिलने के कारण भी ये सफेद हो जाते हैं।
8. अधिक क्रोध, चिंता और श्रम करने पर उत्पन्न हुई गर्मी और पित्त सिर की नाड़ियों तक पहुंचकर बालों को रूखा-सूखा तथा सफेद कर देती हैं।
9. अनियमित खान-पान तथा दूषित आचार-विचार के कारण भी बाल सफेद हो जाते हैं।
बालों के सफेद होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
1. इस रोग का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को संतुलित भोजन, फल, सलाद, अकुंरित भोजन, हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
2. रोगी को गाजर, पालक, आंवले का रस अधिक मात्रा में पीना चाहिए।
3. रोगी व्यक्ति को काले तिल तथा सोयाबीन का दूध पीना चाहिए।
4. इस रोग से बचने के लिए व्यक्ति को बादाम तथा अखरोट का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए।
5. गाय का घी खाने में प्रयोग करने से व्यक्ति के बाल जल्दी सफेद नहीं होते हैं तथा सफेद बालों की समस्या भी दूर हो जाती है।
6. आंवला, ब्राह्मी तथा भृंगराज को आपस में मिलाकर पीस लें। फिर इस मिश्रण को लोहे की कड़ाही में फूलने के लिए रख दें। सुबह के समय इसको मसलकर लेप बना लें फिर इसके बाद 15 मिनट तक इसे बालों में लगाएं। इस प्रकार से उपचार सप्ताह में 2 बार करने से बाल सफेद होना बंद होकर कुदरती काले हो जाते हैं।
7. गुड़हल के फूल तथा पोदीने की पत्तियों को एकसाथ पीसकर थोड़े से पानी में मिलाकर लेप बना लें। फिर इस लेप को अपने बालों पर सप्ताह में कम से कम दो बार आधे घण्टे के लिए लगाएं। ऐसा करने से सफेद बाल काले होने लगते हैं।
8. चुकन्दर के पत्तों का लगभग 80 मिलीलीटर रस सरसों के 150 मिलीलीटर तेल में मिलाकर आग पर पकाएं। फिर जब पत्तों का रस सूख जाए, तो आग पर से उतार लें। फिर इसे ठंडा करके छानकर बोतल में भर लें। इस तेल से प्रतिदिन सिर की मालिश करने से बाल झड़ना रुक जाते हैं और समय से पहले सफेद नहीं होते हैं। इससे बालों की कई प्रकार की समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
9. बादाम के तेल तथा आंवले के रस को बराबर मात्रा में मिला लें। इस तेल से रात को सोते समय सिर की मालिश करने से बाल सफेद होना बंद हो जाते हैं।
10. रात के समय तुलसी के पत्तों को पीसकर और इसमें आंवले का चूर्ण मिलाकर पानी में भिगोने के लिए रख दें। सुबह के समय में इस पानी को छानकर इससे सिर को धो लें। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में सफेद बाल काले हो जाते हैं।
11. आंवले के चूर्ण को नींबू के रस में मिलाकर बालों में लगाने से बाल काले, घने तथा मजबूत हो जाते हैं।
12. बाल सफेद होने पर सूर्यतप्त आसमानी तेल से सिर की मालिश करने से बाल सफेद होना बंद हो जाते हैं।
13. बालों को सफेद होने से रोकने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को मानसिक दबाव तथा चिंता को दूर करना चाहिए और फिर इसका उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से करना चाहिए।
14. कई प्रकार के योगासन (सर्वांगासन, मत्स्यासन, शवासन तथा योगनिद्रा) प्रतिदिन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है और उसके बाल सफेद होना रुक जाते हैं।
15. भोजन करने के बाद खोपड़ी को खुजलाते हुए कंघी करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
बालों को झड़ने तथा सफेद होने से बचाने के लिए कुछ चमत्कारी बालों का तेल बनाने का तरीका-
1. सबसे पहले एक लोहे का बर्तन ले लें। इसके बाद इसमें 1 लीटर नारियल का तेल, 100 ग्राम आंवला, रीठा, शिकाकाई पाउडर, 1 बड़ा चम्मच मेंहदी, 2 चम्मच रत्नजोत पाउडर को एकसाथ मिलाकर सूर्य की रोशनी में कम से कम एक सप्ताह तक रखें। फिर इसके बाद इसे धीमी आग पर उबालें तथा उबलने के बाद इसको छानकर इसमें नींबू का रस तथा कपूर मिलाकर बोतल में भर कर रख दें। इसके बाद प्रतिदिन इस तेल को बालों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लम्बे घने और काले हो जाते हैं।
2. आधा किलो सूखे आंवले को कूटकर साफ कर लें तथा इसके बाद मुलैठी को कूटकर आपस में मिला लें। फिर इसमें आठ गुना पानी मिलाकर किसी बर्तन में इसे फूलने के लिए छोड़ दें। फिर सुबह के समय में इसे धीमी आग पर उबालने के लिए रख दें। इस मिश्रण को तब तक गर्म करना चाहिए, जब तक कि इसका पानी आधा न रह जाए। फिर इसे आग पर से उतार लें और इसे अच्छी तरह से मिलाकर छान लें। इसके बाद फिर से इस मिश्रण को तेल में मिलाकर आग पर गर्म करें तथा इसे तब तक गर्म करें जब तक कि इसका सारा पानी जल न जाये। इसके बाद इसे आग से उतार लें और इसमें इच्छानुसर सुगन्ध तथा रंग मिलाकर किसी बोतल में भर लें। इसके बाद प्रतिदिन इस तेल को बालों पर लगाएं। इस तेल को लगाने से सिर का दर्द, बालों का सफेद होना, बालों का झड़ना रुक जाता है तथा रोज इसके उपयोग से बाल लम्बे, घने तथा काले हो जाते हैं। इस तेल से सिर की खुश्की भी दूर हो जाती है।
3. 250 ग्राम घिया (लौकी) को लेकर अच्छी तरह से पीस लें और फिर इसे महीन कपड़े से छानकर इसका सारा पानी बाहर निकाल लें। इसके बाद इसमें 250 मिलीलीटर नारियल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब तक तेल थोड़ा गर्म न हो जाए तब तक इसमें लौकी का निकाला हुआ पानी धीरे-धीरे डालते रहें और इसे उबलने दें। जब सारा पानी जल जाए तब इसको आग पर से उतार लें। इस तेल को ठंडा करके बोतल में भर दी
          इस तेल को प्रतिदिन बालों पर लगाने से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं। इस तेल के उपयोग से सिर को ठंडक मिलती है। इस तेल को रोजाना इस्तेमाल करने से व्यक्ति की याद्दाश्त तेज होती है। पैर के तलवों में जलन होने पर इस तेल से पैर के तलवों की मालिश करने से बहुत आराम मिलता है। इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोगी के बालों से सम्बन्धित सारे रोग ठीक हो जाते